ना जाने यह कहां आ गये हम


ना जाने यह कहां आ गये हम
यह सवाल है पुछने वाला, यह सवाल है रुठने वाला
फिर आंखें मूंद के घुटता है दम
ना जाने यह कहाँ आ गये हम ।

ढूंढती हूं जौ पूरानी छीपी बाते कहीं
ढूंढती हूं जौ पूरानी छीपी यादें कहीं
मन परेशान सा है क्यौं हर दम
न जाने कहाँ आ गये हम ।

साथ जो, अब साथ नहीं 
साथ रहकर भी अब वोह बात नहीं 
सपने से लगते हैं अब वोह सारे पल 
न जाने कहाँ आ गये हम ।

यादौं से वापिस लाने का जरिया दे कोई
या फिर सब सही करने के लिए परियां दे कोई
लगती है जिंदगी पहले से काफी कम
न जाने यह कहाँ आ गये हम ।




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