अनजाना चेहेरा, अनजाना डर


आज हूआ एहसास उस डर का
बिना चेहरे ,बिना पहचान के उस शख्स का
यूं तो दिल संभाल आगे बढने लगी हूं मैं 
पर एहसास घबराहट का फिर भी साथ लिऐ चली हुं मैं 
सोचती हुं कि बता दूं, इस वक्त क्या है हाल मेरा
फिर रूकती हूं, सोचती हूं
जब दर्द मेरा, फिर क्यौं लडना तेरा
बता भीदूं, तो क्या देगा कोई साथ  मेरा
साथ तो क्या, काट कर पंख मेरे बढाएगा खोफ मेरा
कहना तो लोगौं के लिए, है बहुत आसान
पर क्या वह जाने, शब्द उनके ला देते हैं तूफान 


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